कोरोना ने बदल दी जीवन शैली, अब हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे लोग
कोरोना महामारी को करीब डेढ़ वर्ष का समय बीत गया है। इस दौरान इसकी दो लहर आ चुकी हैं। इस दौरान लोगों की जीवन शैली में परिवर्तन आया है। खानपान हो या रहन-सहन सभी में बदलाव दिखाई देने लगा है। अब लोग हाथ मिलाने की जगह नमस्कार करना अधिक पसंद करते हैं। घरों में लोग गमलों में आक्सीजन देने वाले पौधे भी लगाने लगे है।
Feb 4, 2025, 11:18 IST
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कोरोना ने बदल दी जीवन शैली, अब हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे लोग
✅ नमस्ते संस्कृति को पुनर्जीवन – महामारी के दौरान हाथ मिलाने और गले मिलने से संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण लोगों ने हाथ जोड़कर अभिवादन (नमस्ते) करने की परंपरा को अपनाया।
✅ स्वास्थ्य और स्वच्छता प्राथमिकता बनी – कोरोना के प्रभाव से लोगों में हैंड सैनिटाइजर, मास्क, और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की आदत विकसित हुई, जिससे स्वच्छता को अधिक महत्व दिया जाने लगा।
✅ डिजिटल जीवनशैली को बढ़ावा – वर्चुअल मीटिंग, ऑनलाइन शिक्षा, और डिजिटल लेन-देन में तेजी आई, जिससे लोगों की कार्यशैली और दिनचर्या में स्थायी बदलाव देखने को मिले।
✅ घरेलू और पारिवारिक जुड़ाव में वृद्धि – लॉकडाउन के कारण लोग घर पर अधिक समय बिताने लगे, जिससे परिवारों में आपसी संबंध मजबूत हुए और घर के अंदर मनोरंजन व रचनात्मक गतिविधियों में रुचि बढ़ी।
कोरोना ने बदल दी जीवन शैली, अब हाथ जोड़कर अभिवादन करने लगे लोग
कोरोना महामारी ने न केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि जीवनशैली, सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक संबंधों में भी गहरा प्रभाव डाला। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखने को मिला कि लोग हाथ मिलाने और गले मिलने की जगह हाथ जोड़कर 'नमस्ते' करने लगे। यह परिवर्तन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में देखा गया।
महामारी ने हमारी आदतों, सोच और दिनचर्या को पूरी तरह से बदल दिया। जहां पहले लोग शारीरिक संपर्क से अभिवादन करते थे, अब उन्होंने दूरी बनाए रखना और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना सीख लिया। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कोरोना ने किस तरह हमारी जीवनशैली में स्थायी बदलाव किए हैं।
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1. अभिवादन की बदलती परंपरा – 'नमस्ते' का बढ़ता प्रचलन
महामारी से पहले लोग हाथ मिलाना, गले मिलना और कभी-कभी गाल से गाल मिलाकर अभिवादन करने की आदत में थे। लेकिन संक्रमण के डर से लोग इन पारंपरिक तरीकों से दूर हो गए और 'नमस्ते' को अपनाने लगे।
✔ 'नमस्ते' को वैश्विक पहचान मिली – सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों के नेताओं और आम लोगों ने भी इसे अपनाया।
✔ स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित तरीका – शारीरिक संपर्क के बिना नमस्ते करने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो गया।
✔ संस्कृति और परंपरा को नया जीवन मिला – कोरोना काल में भारतीय परंपरा को नए सिरे से अपनाया गया और विश्व स्तर पर इसकी सराहना की गई।
महामारी के बाद भी यह बदलाव काफी हद तक बना हुआ है, क्योंकि यह सुरक्षित, प्रभावी और सम्मानजनक तरीका है।
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2. स्वास्थ्य और स्वच्छता बनी प्राथमिकता
कोरोना ने हमें यह सिखाया कि स्वास्थ्य और स्वच्छता हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए।
✔ हैंड सैनिटाइजर का उपयोग बढ़ा – अब लोग बार-बार हाथ धोने और सैनिटाइज़र का उपयोग करने लगे हैं।
✔ मास्क पहनने की आदत – भीड़भाड़ वाले स्थानों और बीमार होने पर मास्क पहनना सामान्य व्यवहार बन गया।
✔ सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व समझा – लोग अब भीड़भाड़ से बचने और उचित दूरी बनाए रखने को प्राथमिकता देने लगे हैं।
कोरोना के बाद भी लोग अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए सफाई और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
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3. डिजिटल जीवनशैली को मिला बढ़ावा
महामारी के दौरान लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के कारण लोग अधिक डिजिटल और ऑनलाइन तरीकों को अपनाने लगे।
✔ ऑनलाइन मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम – कई कंपनियों ने घर से काम करने की सुविधा दी, जिससे कर्मचारियों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया।
✔ ऑनलाइन शिक्षा – स्कूल और कॉलेजों की पढ़ाई डिजिटल हो गई, जिससे छात्रों की पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल गया।
✔ डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स का विस्तार – लोग अब कैश की जगह UPI, ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे।
यह बदलाव महामारी के बाद भी जारी है, क्योंकि यह सुविधाजनक, सुरक्षित और समय बचाने वाला तरीका है।
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4. पारिवारिक जीवन और सामाजिक रिश्तों में बदलाव
लॉकडाउन और कोरोना संकट के कारण लोगों ने घर पर अधिक समय बिताना शुरू किया, जिससे पारिवारिक जीवन और रिश्तों में बड़े बदलाव देखे गए।
✔ परिवार के साथ समय बिताने की आदत – पहले लोग काम में व्यस्त रहते थे, लेकिन महामारी ने परिवार के महत्व को फिर से उजागर किया।
✔ घर का खाना और हेल्दी लाइफस्टाइल – लोगों ने बाहर के खाने की बजाय घर पर ही पौष्टिक और हेल्दी खाना बनाना शुरू किया।
✔ मनोरंजन और नई गतिविधियाँ – परिवारों ने एक साथ फिल्में देखना, गेम्स खेलना और नई चीजें सीखने की आदत डाली।
इस बदलाव ने लोगों को अपने परिवार और रिश्तों को अधिक महत्व देने की सीख दी।
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5. मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता
महामारी के दौरान कई लोगों को तनाव, अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके चलते मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी और लोग योग, ध्यान और सकारात्मक सोच को अपनाने लगे।
✔ योग और मेडिटेशन को अपनाया – मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को अधिक महत्व दिया जाने लगा।
✔ वर्क-लाइफ बैलेंस पर ध्यान – अब लोग काम के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
✔ काउंसलिंग और थैरेपी को स्वीकार किया जाने लगा – पहले मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक थी, लेकिन अब लोग खुले तौर पर इस पर बात करने लगे हैं।
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6. सतत (सस्टेनेबल) और सरल जीवनशैली की ओर बढ़ता रुझान
कोरोना ने लोगों को यह सिखाया कि जीवन की सादगी और स्वास्थ्य ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। महामारी के बाद लोग कम उपभोग, अधिक बचत, और सतत जीवनशैली की ओर बढ़ने लगे।
✔ फालतू खर्चों में कटौती – लोग अब सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं और बचत को प्राथमिकता दे रहे हैं।
✔ सादा और स्वास्थ्यवर्धक जीवन – खान-पान और दिनचर्या को अधिक स्वस्थ और प्राकृतिक बनाया गया।
✔ प्राकृतिक और स्वदेशी चीजों की ओर वापसी – जैविक खेती, घरेलू चिकित्सा, और देसी उत्पादों को अपनाने का चलन बढ़ा।
यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है।
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निष्कर्ष: कोरोना से बदली जीवनशैली का नया रूप
कोरोना महामारी ने हमें जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने और जीने की प्रेरणा दी। इस दौरान हमने न केवल स्वच्छता, स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत समझी, बल्कि डिजिटल और सरल जीवनशैली को भी अपनाया।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह आया कि हाथ जोड़कर 'नमस्ते' करने की परंपरा फिर से जीवित हो गई, जिससे यह साबित हुआ कि भारतीय संस्कृति में छिपी परंपराएं वैज्ञानिक और लाभदायक हैं।
अब सवाल यह है कि क्या हम इन सकारात्मक बदलावों को हमेशा के लिए अपनाए रख पाएंगे? महामारी भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन इससे मिली सीख को हमेशा के लिए अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।