BJP ने केजरीवाल समेत 26 में से 16 किले ढहाए:जाट बहुल सभी 10 सीटें भी छीन लीं; AAP कहां बिखरी, 8 अंदरूनी फैक्टर्स
BJP ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 26 में से 16 किले ढहा दिए हैं। इनमें अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा सीट भी शामिल है। इन 26 सीटों पर AAP लगातार 3 विधानसभा चुनावों से जीत रही थी।
Feb 8, 2025, 20:41 IST
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BJP को सबसे ज्यादा फायदा वेस्ट और नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में हुआ है। 2020 में यहां की 20 सीटों में से BJP सिर्फ 1 सीट जीती थी, लेकिन इस बार बढ़कर 16 सीटें जीत गई है। इन इलाकों में पंजाबी, पूर्वांचली और दलित वोटर सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा दिल्ली की सभी 10 जाट बहुल सीटें BJP ने जीतीं।
27 साल बाद दिल्ली में BJP की वापसी और आम आदमी पार्टी की हार के ऐसे ही रोचक डेटा इनसाइट और फैक्टर जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…
BJP ने केजरीवाल समेत 26 में से 16 किले ढहाए: जाट बहुल सभी 10 सीटें भी छीनी; AAP कहां बिखरी, 8 अंदरूनी फैक्टर्स
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका लगा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी के 26 गढ़ों में से 16 पर कब्जा कर लिया। खास बात यह रही कि जाट बहुल सभी 10 सीटों पर भी BJP ने जीत दर्ज की।
AAP की हार के 8 अंदरूनी फैक्टर्स:
1. केजरीवाल की गिरफ्तारी और नेतृत्व संकट:
अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी का नेतृत्व कमजोर हुआ।
जनता में यह संदेश गया कि पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है।
2. जाट वोटों का BJP की ओर शिफ्ट होना:
जाट बहुल इलाकों में BJP ने जबरदस्त पकड़ बनाई।
AAP के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग गई।
3. मोदी फैक्टर और राष्ट्रवाद का मुद्दा:
BJP ने अपने चुनाव प्रचार में मोदी सरकार की नीतियों को आक्रामक तरीके से प्रचारित किया।
राम मंदिर, धारा 370 और हिंदुत्व के मुद्दे भी असरदार साबित हुए।
4. AAP का कमजोर संगठनात्मक ढांचा:
बीजेपी के मजबूत संगठन के मुकाबले AAP का जमीनी नेटवर्क कमजोर पड़ा।
कार्यकर्ताओं में भी जोश की कमी दिखी।
5. सहयोगी दलों का असमंजस:
I.N.D.I.A गठबंधन की अंदरूनी गुटबाजी और तालमेल की कमी ने AAP को नुकसान पहुंचाया।
कांग्रेस के मतदाता भी BJP की ओर शिफ्ट हो गए।
6. फ्री बिजली-पानी का असर घटा:
जनता में फ्री योजनाओं की लुभावनी अपील पहले जैसी नहीं रही।
मतदाता विकास और सुरक्षा के बड़े मुद्दों पर वोट करने लगे।
7. BJP का आक्रामक प्रचार:
बीजेपी ने सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर AAP के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया।
AAP के घोटालों को मुद्दा बनाकर जनता को BJP के पक्ष में किया।
8. वोटों का ध्रुवीकरण:
हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण ने भी BJP को फायदा पहुंचाया।
AAP का कोर वोट बैंक बंट गया, जिससे पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ।
निष्कर्ष:
AAP को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है, खासकर जाट बहुल इलाकों में जहां BJP ने पूरी तरह से पकड़ बना ली। AAP को अगर वापसी करनी है, तो उसे संगठन को मजबूत करने, नए मुद्दों पर फोकस करने और अपनी रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत होगी।