महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान कल... महाशिवरात्रि पर स्नान के लिए उमड़ेगी भीड़, होगी कुंभ की विदाई
जो अभी तक कुंभ में नहीं जा पाए हैं, और कल्पवास नहीं कर सके हैं, वह संगम तट पर शिवरात्रि का स्नान करके व्रत रखते हुए कल्पवास कर सकते हैं. इसके लिए एक दिन पहले ही त्रयोदशी तिथि के दिन केवल एक समय ही भोजन ग्रहण करें. फिर शिवरात्रि के दिन, घाट पर पहुंचकर स्नान करें और फिर यहां व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
Feb 25, 2025, 20:57 IST
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शिव और शक्ति के मिलन का खास पर्व है शिवरात्रि. यूं तो हर माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी के संयोग को शिवरात्रि कहा जाता है, लेकिन फाल्गुन माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की तिथि महाशिवरात्रि कहलाती है. इस दिन की विशेष मान्यता है कि यह शिव-पार्वती के विवाह का दिन है. प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह इसलिए भी खास है, क्योंकि बुधवार को ही महाकुंभ का अंतिम अध्याय यानी अंतिम शाही स्नान भी है. कई अखाड़े तो माघ पूर्णिमा के स्नान के बाद ही विदा ले चुके हैं, लेकिन शिवरात्रि का दिन महाकुंभ की विदाई का दिन भी होता है. इस दिन भी कुछ अखाड़े स्नान करते हैं और फिर कुंभ समापन की घोषणा होती है.
महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है, खासकर जब यह महाशिवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर पड़ता है। महाशिवरात्रि के दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अंतिम शाही स्नान के दिन लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के लिए उमड़ते हैं। अखाड़ों के संत-महात्मा भव्य शोभा यात्राओं के साथ संगम तट पर पहुंचते हैं और परंपरागत रूप से स्नान करते हैं। इसके बाद महाकुंभ का समापन माना जाता है और संगम नगरी एक बार फिर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आती है।
यदि आप स्नान करने की योजना बना रहे हैं तो सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और भीड़भाड़ से सतर्क रहें। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर शिव का आशीर्वाद सब पर बना रहे!