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3 साल की मासूम से दुष्कर्म, 9 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट, 6 महीने में मिली आजीवन कारावास की सजा

27 अगस्त 2024 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तीन साल और 3 महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म की गंभीर घटना सामने आई थी. शाम छह बजे जब घटना की सूचना उमरगाम थाने में दी गई तो पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल के लिए भेज दिया था.
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3 साल की मासूम से दुष्कर्म
आम तौर पर बलात्कार या दुष्कर्म के मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई के चलते पीडित परिवार थक जाते हैं, लेकिन पिछले 3 साल में गुजरात सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता लेते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट और तेज पुलिस प्रक्रिया से पीड़ित परिवारों को त्वरित न्याय दिलाया है. ऐसा ही एक केस वलसाड का था जहां सिर्फ 9 दिन में चार्जशीट और 6 महीने में आरोपी को सजा सुनाई गई.
यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है, लेकिन साथ ही यह न्याय प्रणाली की तेजी और दृढ़ता का भी उदाहरण है। 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए इस भयावह अपराध में पुलिस ने महज 9 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी, और अदालत ने 6 महीनों के भीतर दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्याय की त्वरित प्रक्रिया: एक मिसाल
पुलिस की शीघ्र जांच और चार्जशीट दाखिल करने की तत्परता दिखाती है कि अब ऐसे मामलों में कोई देरी नहीं हो रही।
अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द फैसला सुनाया, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला।
यह फैसला समाज में एक सख्त संदेश देता है कि बच्चों के साथ अपराध करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।
क्या सीखा जा सकता है?
त्वरित न्याय प्रणाली से अपराधियों में भय बढ़ेगा।
समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सरकार और कानून-व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की दिशा में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यह मामला एक उदाहरण है कि अगर पुलिस, न्यायपालिका और समाज मिलकर काम करें, तो न्याय में देरी नहीं होगी और अपराधियों को सख्त सजा मिलेगी।